समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पिछले लोकसभा चुनाव में अमेठी से भाग गए थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए सीट-शेयरिंग को लेकर इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के बीच खींचतान चल रही है। एएनआई से बात करते हुए पटेल ने कहा कि राज्य में राहुल गांधी की कोई जमीनी पकड़ नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यहां कोई जमीनी हकीकत नहीं है। असल बात यह है कि हमें याद है कि पिछले लोकसभा चुनाव में वे अमेठी से भाग गए थे। वे अमेठी से क्यों भागे? वे डरे हुए थे, क्योंकि वे पहले ही एक बार हार चुके थे।
शिवपाल ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की सलाह पर कि वे पार्टी की पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ें, राहुल गांधी आखिरकार रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए सहमत हुए। उन्होंने कहा कि बहुत मुश्किल से वे रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए सहमत हुए। वे दक्षिण भारत से चुनाव लड़ना चाहते थे। तब अखिलेश यादव जी ने समझाया कि यह हमेशा से आपकी पार्टी की पारंपरिक सीट रही है और हम चाहते हैं कि आप यहीं से चुनाव लड़ें। और दिसंबर के बाद से वे वहां गए भी नहीं थे। इसलिए अखिलेश यादव जी ने कहा कि अगर आप चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो हम अपना उम्मीदवार उतार देंगे। उन्होंने उनसे कहा कि ठीक है, आप जाइए। फिर वे सहमत हो गए और सबने मिलकर कड़ी मेहनत की। उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव जी ने अपने सभी वोटरों से राहुल गांधी को पूरे जोर-शोर से वोट देने के लिए भी कहा। तो जब वे खुद हम पर निर्भर हैं, तो इसका मतलब है कि उनकी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व समझता है कि यहां हमारा कोई बड़ा जनाधार नहीं है।
कांग्रेस की 150 सीटों की कथित मांग पर पटेल ने कहा कि इनमें से कुछ छोटे-मोटे नेता बेतुकी बातें करते रहते हैं। 150 सीटों की मांग करना, आधी सीटें मांगना, यह सही नहीं है, यह गठबंधन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ही तय करेंगे कि कितनी सीटें दी जाएं। मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस पार्टी की मांगें बहुत अनुचित हैं। अभी उनके पास दो विधायक हैं, जबकि हमारे पास 125 हैं। इस अनुपात के हिसाब से उन्हें सात या आठ सीटें मिलनी चाहिए। हम उन्हें 50 सीटें भी दे सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा सीटें देने का मतलब होगा सीटों की बर्बादी और हार का जोखिम उठाना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मनमानी मांगें करने के बजाय अपनी असल संख्या और स्थिति के आधार पर सीटों की मांग करनी चाहिए। उनकी वास्तविक क्षमता लगभग 25 से 30 सीटों की है।
2024 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें 17 सीटें दी गई थीं, जिनमें से वे सिर्फ छह ही जीत पाए। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन से सपा को नुकसान हुआ था। सिर्फ कांग्रेस की वजह से ही जिस पार्टी ने राज्य में इतना अच्छा काम किया था, उसे इतनी सारी सीटें गंवानी पड़ीं। गठबंधन पर पटेल ने कहा कि अखिलेश यादव जी पूरी तरह से पक्के हैं कि हम अपने गठबंधन का सम्मान करेंगे, लेकिन इसकी भी एक सीमा है। अगर आपके पास उम्मीदवार ही नहीं है, तो जबरदस्ती सीटों की मांग करने का क्या मतलब है। उन्होंने पिछड़े और दलित समुदायों के बीच सपा का समर्थन आधार बढ़ाने का श्रेय पार्टी के पीडीए फॉर्मूले को दिया और दावा किया कि जो वोटर पहले बसपा का समर्थन करते थे, वे अब सपा की तरफ आ गए हैं।
उन्होंने कहा कि हर कोई जानता है कि सिर्फ अखिलेश यादव ही अच्छा शासन दे सकते हैं, सभी के लिए न्याय सुनिश्चित कर सकते हैं और सबके भले के लिए काम कर सकते हैं। इसीलिए जनता अखिलेश यादव के साथ खड़ी है और इसमें कांग्रेस का कोई योगदान नहीं है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर पटेल ने कहा कि राज्य में पार्टी का जन-आधार बहुत कम है। उन्होंने कहा कि मैं उनकी संख्या के बारे में क्या कहूं, यहां उनका जन-आधार बहुत कम है, न के बराबर। तो जब आपके पास जन-आधार ही नहीं है, तो वोट बैंक की तो बात ही छोड़ दीजिए। इस बीच पटेल के बयानों के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन के दो सहयोगियों के बीच सार्वजनिक मतभेद के बावजूद सीट-बंटवारे की बातचीत और कांग्रेस के बारे में अपनी राय पार्टी के अंदर ही रखें। अखिलेश यादव ने कहा कि मैं अपने सभी नेताओं से कहना चाहता हूं कि सीट-बंटवारे को लेकर उनकी जो भी राय या चिंताएं हैं, उन्हें हमारे साथ साझा करना चाहिए।
यूपी कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने राज्य-स्तर पर हो रही चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि सीट-बंटवारे का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ही सीटों की संख्या और किसी भी गठबंधन के समय के बारे में फैसला करेगा। इससे पहले यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि सीट-बंटवारे को अक्टूबर में अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के पास सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं। गठबंधन के तहत कांग्रेस पार्टी 50 प्रतिशत सीटें पाने की हकदार है और कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। गौतम ने आगे कहा था कि पिछले दो महीनों से कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सीट-बंटवारे पर काम कर रही है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और मैं इस काम को देख रहे हैं। कांग्रेस और सपा ने राज्य में गठबंधन सहयोगियों के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। उत्तर प्रदेश में 2027 में चुनाव होने हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 41.29 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 403 में से 255 सीटें जीतीं, जबकि सपा ने 32.06 प्रतिशत वोटों के साथ 111 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस ने 2.33 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा ने 12.88 प्रतिशत वोटों के साथ एक सीट जीती।
