उत्तर प्रदेश में बारिश तो बंद हो चुकी है, लेकिन बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बांधों और बैराजों से छोड़े गए पानी की वजह से नदियां उफान पर हैं। प्रदेश के 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान तेज हो गया है। रविवार सुबह कई पेड़ और मकान नदी में समा गए। बाढ़ की वजह से एक गांव में बाघ घुस आया, जिससे गांववालों में दहशत फैल गई। उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे गांवों में जंगली जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा बढ़ गया है। चंपापुरवा गांव में मगरमच्छ घुस आया, जिसे ग्रामीणों ने पकड़कर उसका मुंह बांध दिया। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस गया है। करीब 10 हजार लोग घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर पलायन कर गए हैं। गलियों में नावें चल रही हैं और गोमती रिवर फ्रंट पूरी तरह जलमग्न है। इसे अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
मौसम विभाग यानी आईएमडी ने बताया कि दक्षिण पश्चिम मानसून तय समय से दो दिन पहले ही 3 अक्टूबर को वापस लौट गया। मानसून ने 12 दिन की देरी से 30 जून को यूपी में एंट्री की थी। यानी इस साल मानसून यूपी में 95 दिनों तक एक्टिव रहा। सवाल यह है कि जब बारिश थम चुकी है, तो फिर नदियों का जलस्तर क्यों बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ऊपरी इलाकों में बारिश का पानी नीचे आ रहा है। नेपाल, उत्तराखंड और यूपी के ऊपरी जिलों में हुई तेज बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी इलाकों में पहुंच रहा है। इसलिए यूपी में बारिश रुकने के बाद भी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। लखनऊ, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी जैसे जिलों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। दूसरी बड़ी वजह बैराज और बांधों से छोड़ा जा रहा पानी है। ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण बैराज और जलाशयों में पानी बढ़ जाता है, जिसके बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है। यह पानी कुछ समय बाद यूपी की नदियों में पहुंचता है और जलस्तर बढ़ जाता है। इसका असर अयोध्या और गोरखपुर जैसे मैदानी जिलों में देखने को मिलता है। लखनऊ की गोमती नदी में पानी भी इसी वजह से बढ़ता है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
