SIR विवाद में नया मोड़: SC जज के बयान के बाद कांग्रेस का CEC पर हमला, जानें पूरा सियासी घटनाक्रम

वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद में एक और नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुयान के उस बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लाखों नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाला कोई भी प्रोसेस मनमाना है। इस बयान के बाद सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के जज ने पोल चीफ की पूरी पोल खोल दी है।

जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जस्टिस उज्जल भुयान ने हैदराबाद में नालसर यूनिवर्सिटी में सीईसी की पूरी पोल खोल दी। अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी भी शर्म है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। रमेश ने आरोप लगाया कि जी2 के गैर-कानूनी ऑर्डर पर अमल करने की उनकी काबिलियत ने उन्हें देश के लिए बोझ बना दिया है। यह बयान जस्टिस भुयान के रविवार को हैदराबाद में 19वें नालसर बीआरएस मूट कोर्ट कॉम्पिटिशन के समापन समारोह में दिए गए भाषण के बाद आया है। उस भाषण में जस्टिस भुयान ने कहा था कि अगर किसी प्रोसेस का नतीजा लाखों-करोड़ों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है और उन्हें अपने ही देश में सेकंड-क्लास नागरिक बनाना है, तो ऐसा प्रोसेस असल में मनमाना है। कोई भी बात इसे सही नहीं ठहरा सकती। यह संविधान की आत्मा पर हमला है।

इसे भी पढ़ें.  ममता बनर्जी पर FIR, हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्यों बढ़ा बंगाल का सियासी पारा

यह पूरा विवाद ईसीआई और एसआईआर के बीच चल रही खींचतान का हिस्सा है, जिसमें विपक्ष लगातार चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को निशाना बना रहा है। रविवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक प्रोटेस्ट मार्च निकाला। इसमें केंद्र सरकार पर उन्हें बचाने का आरोप लगाया गया। मार्च को आईवाईसी के नेशनल प्रेसिडेंट उदय भानु चिब ने लीड किया। एएनआई से बात करते हुए चिब ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की और कहा कि उन्हें जंतर-मंतर जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि शांति से प्रोटेस्ट करने के लिए जंतर-मंतर जाना होगा, लेकिन उन्हें इजाजत नहीं दी जा रही है, क्योंकि मोदी और शाह को ज्ञानेश को बचाना है। उन्होंने कहा कि देश के इस गद्दार ज्ञानेश को बचाया नहीं जा सकता।

इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर इलेक्टोरल रोल, वोटर रजिस्ट्रेशन और कमीशन के टेक्नोलॉजी सिस्टम पर फैसलों पर ऑफिशियली आपत्ति जताई थी। हालांकि इलेक्शन कमीशन ने इस दावे को खारिज कर दिया है। ईसीआई का कहना है कि ड्राफ्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसके स्टैंडर्ड एडमिनिस्ट्रेटिव और फैसले लेने के प्रोसेस का हिस्सा थे। कमीशन ने यह भी कहा कि एसआईआर एक्सरसाइज के शेड्यूल के बारे में फैसले एकमत से लिए गए थे। फिलहाल इस पूरे मामले में सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और सभी की नजरें अब आगे की सुनवाई और कार्रवाई पर टिकी हैं।

इसे भी पढ़ें.  Diljit Dosanjh Aura India Tour 2026: दिलजीत 7 शहरों में करेंगे धमाका, 1 नवंबर को दिल्ली से शुरू—जानें तारीखें और टिकट डिटेल
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *