केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक अहम बैठक बुधवार को हुई। इस बैठक में तीन बड़े फैसले लिए गए। एक फैसला किसानों के हित में है तो दूसरे फैसले का असर ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर पड़ेगा। इसके अलावा तीसरा फैसला दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दी। गेहूं का एमएसपी रबी विपणन सत्र 2026-27 में 2,585 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया था। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि नए सत्र के लिए एमएसपी 2,610 रुपये रखा गया है।
सरकार ने 2027-28 सत्र के लिए गेहूं के अलावा पांच अन्य रबी फसलों के लिए भी एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है। जौ का एमएसपी 136 रुपये बढ़ाकर 2,286 रुपये, चने का 83 रुपये बढ़ाकर 5,958 रुपये और मसूर का 390 रुपये बढ़ाकर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसी तरह रैपसीड-सरसों का एमएसपी 413 रुपये बढ़ाकर 6,613 रुपये और कुसुम का 675 रुपये बढ़ाकर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। वैष्णव ने कहा कि 2027-28 के रबी विपणन सत्र में 324 लाख टन फसल की अनुमानित खरीद पर किसानों को कुल 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का अनुमान है। बता दें कि एमएसपी तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी सीएसीपी की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। इसमें उत्पादन लागत के अलावा अल-नीनो की आशंका तथा घरेलू एवं वैश्विक कीमतों के रुझान को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार ने 2026-27 फसल वर्ष में गेहूं का उत्पादन लक्ष्य 12.1 करोड़ टन रखा है। प्रमुख रबी फसल गेहूं की बुवाई आम तौर पर अक्टूबर से शुरू होती है और कटाई अप्रैल से शुरू होती है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को तीसरे चरण की हरित ऊर्जा गलियारा योजना को मंजूरी दे दी। इस पर कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। यह योजना भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिन्यूएबल एनर्जी को पावर ग्रिड से जोड़ने और उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने में मदद करेगी। योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये का व्यय रखा गया है।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली यानी आईटीएमएस लागू करने को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें 1,789.52 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है। दिल्ली पुलिस द्वारा लागू किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत मंजूर की गई है। परियोजना के तहत दिल्ली के 42 प्रमुख यातायात कॉरिडोर को तीन चरणों में शामिल किया जाएगा और इसे 24 महीने में लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद पांच वर्षों तक इसका संचालन एवं रखरखाव किया जाएगा।
