केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और जापान के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडो-जापान स्ट्रैटेजिक डायलॉग’ कार्यक्रम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के नेतृत्व के बीच मजबूत सहयोग के चलते दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता भरोसे, दीर्घकालिक सहयोग और साझा विकास पर आधारित है।
मंत्री ने बताया कि 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के बाद जापान ने भारत में लगभग 100 ट्रिलियन येन (करीब 65 से 70 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश का संकल्प लिया था। यह निवेश बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किया जा रहा है।
पीयूष गोयल ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और जापान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस दौरान भारत का जापान को निर्यात 21.43 अरब डॉलर और आयात 6.04 अरब डॉलर दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी आने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि भारत जापान को मुख्य रूप से ऑर्गेनिक केमिकल्स, ऑटोमोबाइल उत्पाद, न्यूक्लियर रिएक्टर से जुड़े उपकरण, एल्युमीनियम उत्पाद और समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात करता है। वहीं जापान से भारत न्यूक्लियर रिएक्टर उपकरण, तांबा, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इनऑर्गेनिक केमिकल और लोहा-इस्पात का आयात करता है।
गोयल ने कहा कि भारत जापान को केवल कच्चा माल नहीं बल्कि वैल्यू एडेड और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद निर्यात करता है। उन्होंने इसे भारत के विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का प्रमाण बताया।
पूर्वोत्तर भारत के विकास का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत यह क्षेत्र आसियान देशों के साथ व्यापार का प्राकृतिक प्रवेश द्वार बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान मिलकर पूर्वोत्तर में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास पर काम कर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में करीब 12 प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर भारतीय हैं, जिससे भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति बना रहा है।
मंत्री ने कहा कि जापान भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण भागीदार बनते देखना चाहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों का सहयोग आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
पीयूष गोयल ने मारुति सुजुकी का उदाहरण देते हुए कहा कि जापान का भारत में निवेश चार दशक पहले ही औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रख चुका है। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है और इसमें जापानी निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में भी भारत-जापान सहयोग को अहम बताते हुए कहा कि भारतीय युवाओं के लिए जापानी भाषा और संस्कृति का प्रशिक्षण रोजगार के नए अवसर खोल सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसे और साझेदारी का यह संबंध भविष्य में और अधिक मजबूत होगा।
