
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ तहसील के त्रिवेदीगंज क्षेत्र में एक बड़े भूमि घोटाले के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि धरा इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मनीष कुमार सिंह ने आवश्यक सरकारी अनुमतियां लिए बिना कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कर सैकड़ों लोगों को प्लॉट बेच दिए। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, त्रिवेदीगंज विकासखंड के करमेंमऊ गांव में कंपनी ने कृषि भूमि का भू-उपयोग बदले बिना ही प्लॉट काटकर बिक्री शुरू कर दी। आरोप है कि न तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-80 के तहत भूमि का उपयोग परिवर्तन कराया गया और न ही जिला पंचायत से ले-आउट नक्शा स्वीकृत कराया गया। इसके अलावा परियोजना RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) में भी पंजीकृत नहीं है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कंपनी अब तक करीब 500 प्लॉट बेच चुकी है। आरोप है कि खरीदारों को यह जानकारी नहीं दी गई कि परियोजना के पास आवश्यक कानूनी स्वीकृतियां नहीं हैं। साथ ही सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
मामले में सरकारी भूमि पर कब्जे के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक गाटा संख्या 222, जो सरकारी रास्ते के नाम दर्ज है, उस पर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है। वहीं गाटा संख्या 212, जो वृक्षारोपण के लिए दर्ज सरकारी भूमि बताई जा रही है, उस पर भी निर्माण किए जाने का आरोप है।
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के एजेंट किसानों और आम लोगों को सरकारी विकास योजनाओं और भविष्य में इलाके के विकास का हवाला देकर प्लॉट खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आरोप है कि खरीदारों को भविष्य में रजिस्ट्री, नक्शा पास होने और मकान निर्माण से जुड़ी संभावित कानूनी समस्याओं की जानकारी नहीं दी जा रही।
बताया जा रहा है कि विभिन्न गाटा संख्याओं में बड़ी संख्या में प्लॉट बेचे जा चुके हैं। इनमें गाटा संख्या 263 में 118 प्लॉट, 267 में 60, 266 में 44, 268 में 42, 265 में 11, 264 में 11 और 258 में 10 प्लॉट की बिक्री होने का दावा किया जा रहा है।
इतने बड़े स्तर पर कथित अवैध प्लॉटिंग के बावजूद अब तक राजस्व विभाग, जिला पंचायत या अन्य संबंधित विभागों की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे स्थानीय लोगों ने विभागीय मिलीभगत की आशंका जताई है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। धरा इंफ्रा की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि संबंधित विभागों की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा सकती है।

धरा इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्लॉटिंग
