सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के लिए दिल्ली पुलिस का 30 सेकेंड का ऑपरेशन, सामने आई पूरी रणनीति

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने बेहद गोपनीय योजना बनाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन की जानकारी केवल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक सीमित रखी गई थी। पुलिस ने पूरी कार्रवाई महज 30 सेकेंड के भीतर पूरी कर ली।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई दिल्ली के नए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के पदभार संभालने के एक दिन बाद हुई। इससे पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद पर बदलाव करते हुए नए कमिश्नर की नियुक्ति की थी।

सुरक्षा अभ्यास के नाम पर बुलाई गई पुलिस

रिपोर्ट्स के अनुसार, संसद के मानसून सत्र से पहले सुरक्षा अभ्यास का हवाला देकर शनिवार तड़के नई दिल्ली जिले के पुलिसकर्मियों को जंतर-मंतर बुलाया गया। बाद में उन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाकर असली योजना की जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि सोनम वांगचुक को धरना स्थल से 30 सेकेंड के भीतर हटाना है।

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पहले से तैयार थी पूरी रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की दिनचर्या का भी अध्ययन किया था। बताया गया कि आंदोलन का संचालन कर रहे अभिजीत दीपके रोज सुबह कुछ मिनट के लिए शौचालय जाते थे। पुलिस ने इसी समय कार्रवाई करने की योजना बनाई ताकि विरोध कम से कम हो।

सफेद पर्दे की आड़ में हुई कार्रवाई

शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे पुलिस ने मंच के सामने सफेद कपड़ा लगा दिया। इसी दौरान सोनम वांगचुक को मंच से हटाकर पहले से तैयार एंबुलेंस में बैठाया गया और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके में फोन जैमर लगाए जाने की भी बात सामने आई है, ताकि सूचना तुरंत बाहर न जा सके।

प्रदर्शनकारी भी हटाए गए

सोनम वांगचुक को हटाने के बाद पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहां से हटाना शुरू कर दिया। इसी दौरान आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके को भी पुलिस ने रोक लिया।

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28 जून से भूख हड़ताल पर थे वांगचुक

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित आंदोलन का हिस्सा बताया गया है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों की जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

रिपोर्ट में किए गए दावे

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछली बार आंदोलन के दौरान पुलिस की योजना पहले ही लीक हो गई थी। इस बार ऐसा न हो, इसलिए पूरी रणनीति केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक ही सीमित रखी गई। पुलिसकर्मियों को अंतिम समय पर ही ऑपरेशन की जानकारी दी गई, जिससे कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय बनी रही।

हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इन दावों पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

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