नई दिल्ली/पणजी। तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांदेकर की खंडपीठ ने गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(एफ), धारा 354(ए) और धारा 354(बी) के तहत दोषी माना।
यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप के अनुसार, गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में तहलका की एक जूनियर महिला सहयोगी के साथ तरुण तेजपाल ने यौन उत्पीड़न किया था। शिकायत के बाद गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की और नवंबर 2013 में उन्हें गिरफ्तार किया था।
बाद में उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्थानीय अदालत ने खारिज कर दी थी। हालांकि, जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी।
मई 2021 में मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। फैसले में जांच से जुड़ी कुछ कमियों, जिनमें सीसीटीवी फुटेज पेश न किए जाने का भी उल्लेख था, का हवाला दिया गया था।
इसके बाद गोवा सरकार ने निचली अदालत के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए सत्र अदालत के फैसले को पलट दिया और तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
इस फैसले के साथ करीब 13 साल पुराने इस बहुचर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव सामने आया है। हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला रहेगा।
