नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गाजियाबाद में मार्च महीने में हुई एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण मामले में बेहद कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने पीड़िता को मेडिकल देखभाल मुहैया कराने में नाकाम रहे आयुर्वेदिक डॉक्टर को जमकर फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि डॉक्टर का रवैया बेहद निर्दयी था।भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले में बच्ची के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में जांच और मेडिकल मदद में हुई गंभीर लापरवाही का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने डॉक्टर से सख्ती से कहा, “एक बच्ची को आपके सामने लाया गया और आप इतने निर्दयी हैं कि आपने उसे मेडिकल सहायता भी नहीं दी। अगर आपमें थोड़ी भी सहानुभूति होती, तो आप उसे खुद अस्पताल ले जाते।”कोर्ट ने इस मामले में अस्पताल की भूमिका को भी बेहद निर्मम बताया। बेंच ने कहा कि जिस अस्पताल में पीड़ित बच्ची को ले जाया गया था, वहां के लोगों ने बहुत संवेदनहीनता दिखाई। अदालत ने अस्पताल को पीड़िता के परिवार को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब हम जुर्माना लगाएंगे तो इसका भयावह असर पड़ेगा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि पीड़ित परिवार के बारे में सोचें और उन्हें उचित मुआवजा दें।यह पहली बार नहीं है जब कोर्ट ने इस मामले में नाराजगी जताई हो। अप्रैल महीने में भी सुप्रीम कोर्ट ने दो प्राइवेट अस्पतालों और स्थानीय पुलिस की उदासीनता पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने तब कहा था कि आरोपी अपराध का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि दो प्राइवेट अस्पतालों और पुलिस ने पूरी तरह से असंवेदनशील रवैया अपनाया। कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए SIT गठित करने का भी आदेश दिया था।
क्या था पूरा मामला?
16 मार्च को गाजियाबाद में यह दिल दहला देने वाली घटना हुई। बच्ची के पिता जब घर लौटे तो पता चला कि पड़ोसी चॉकलेट खरीदने के बहाने बच्ची को अपने साथ ले गया था। जब वे वापस नहीं लौटे तो परिवार ने बच्ची को ढूंढना शुरू किया। बाद में बच्ची बेहोश हालत में खून से लथपथ मिली।परिवार उसे तुरंत दो प्राइवेट अस्पतालों में ले गया, लेकिन दोनों जगहों पर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। आखिरकार बच्ची को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस पूरे मामले में मेडिकल मदद न मिल पाने और पुलिस की लापरवाही ने परिवार को और ज्यादा तकलीफ दी।सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। कोर्ट न सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई चाहता है बल्कि पीड़िता के परिवार को न्याय और उचित मुआवजा भी दिलाना चाहता है।
