उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का साथ छोड़कर सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद उन्होंने वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वह पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे।
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष, @BhimArmyChief एवं नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चन्द्रशेखर आज़ाद जी की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी श्रद्धेय प्रेम प्रकाश जी (पूर्व अपर पुलिस महानिदेशक) ने आज आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की… pic.twitter.com/ICtM0wKm7t
— Aazad Samaj Party – Kanshi Ram (@AzadSamajParty) June 29, 2026
प्रेम प्रकाश के इस फैसले को उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुके हैं, उनका आजाद समाज पार्टी में शामिल होना नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
भाजपा छोड़ने के बाद लिया बड़ा फैसला
सोमवार शाम करीब छह बजे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता लेने के बाद प्रेम प्रकाश ने कहा कि वह सामाजिक न्याय, समान अवसर और संविधान के मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से पार्टी के साथ जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए वह पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पार्टी को नई मजबूती देंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया कि वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरेंगे।

लोकसभा चुनाव से पहले BJP में हुए थे शामिल
पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश ने पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में कदम रखा था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि लंबे प्रशासनिक अनुभव और कानून-व्यवस्था की मजबूत छवि के कारण भाजपा उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि पार्टी में शामिल होने के बाद उनकी सक्रिय भूमिका बहुत कम देखने को मिली और उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी भी नहीं मिली।
अब भाजपा छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाएं बन गई हैं।
कौन हैं पूर्व IPS प्रेम प्रकाश?
प्रेम प्रकाश वर्ष 1993 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी रहे हैं। वह मूल रूप से दिल्ली के निवासी हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग (बीटेक) की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर इन डिप्लोमा (एमडी) का कोर्स भी किया। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदार पदों पर कार्य किया।
उन्होंने मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, कानपुर और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। 12 जुलाई 2009 को उन्होंने लखनऊ में डीआईजी/एसएसपी का कार्यभार संभाला था। बाद में वह प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के पद पर भी तैनात रहे।
31 दिसंबर 2022 को वह एडीजी प्रयागराज के पद से सेवानिवृत्त हुए।
‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में बनी पहचान
प्रेम प्रकाश को उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। कानपुर जोन में तैनाती के दौरान उनके नेतृत्व में करीब 67 पुलिस एनकाउंटर हुए। इसी कारण उन्हें कई लोग “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” के नाम से भी जानते हैं।
उनके कार्यकाल में कई कुख्यात अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाए गए। अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनके काम की अक्सर चर्चा होती रही।
हालांकि पुलिस एनकाउंटर हमेशा सार्वजनिक और कानूनी बहस का विषय रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अपराध नियंत्रण को लेकर उनकी कार्यशैली को काफी प्रभावी माना गया।
मुख्तार अंसारी को पंजाब से यूपी लाने में निभाई अहम भूमिका
प्रेम प्रकाश उस समय भी चर्चा में आए थे जब बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल लाया गया था। उस समय वह प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के पद पर तैनात थे।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस समन्वय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। यह ऑपरेशन उस समय देशभर की मीडिया में सुर्खियों में रहा था।
CAA-NRC प्रदर्शन के दौरान संभाली कानून व्यवस्था
वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए थे। उस दौरान कानपुर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी प्रेम प्रकाश के पास थी।
प्रशासनिक स्तर पर उन्होंने पुलिस बल के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल को लेकर उस समय भी व्यापक चर्चा हुई थी।
बसपा सरकार में रहे प्रभावशाली अधिकारी
प्रेम प्रकाश का प्रशासनिक करियर कई सरकारों के दौरान चर्चा में रहा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार के समय उन्हें मुख्यमंत्री मायावती के भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था। उस दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। हालांकि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें फिर से प्रमुख पदों पर नियुक्त किया गया।
2027 चुनाव पर रहेगा फोकस
आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद प्रेम प्रकाश ने साफ कर दिया है कि उनका अगला लक्ष्य 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव है। उन्होंने कहा कि पार्टी के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के कारण उनका प्रशासनिक अनुभव चुनावी राजनीति में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि चुनावी मैदान में उनकी वास्तविक ताकत का पता आने वाले समय में ही चलेगा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल
प्रेम प्रकाश के भाजपा छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न दल लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रहे हैं और नए चेहरों को जोड़ने में लगे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आजाद समाज पार्टी प्रेम प्रकाश को किस भूमिका में आगे बढ़ाती है और वह 2027 के चुनाव में किस सीट से मैदान में उतरते हैं। फिलहाल उनका यह राजनीतिक फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
