महापुरुष बनाम ‘ग्रेट’: सोशल मीडिया के दौर में बदलती महानता की परिभाषा

बदलते परिदृश्य में….!
लोगबाग….गाँव-देश-समाज में…
खुद को कहाने को “ग्रेट”…
बना रहे हैं टाइम बाउंड “टारगेट”..
उनके शब्दकोश से गायब है शब्द
“वेट”…”टॉलरेट और रिग्रेट”….
पहले ऐसे लोग….गाँव-देश में…
महापुरुष सम्बोधन से….
होते थे “अपडेट”….
अवतार लेते थे….ये महापुरुष…
लोक कल्याण हेतु….!
लोकाभिराम कर्म होते थे….
उनके महापुरुष बनने के आधार
आज के दौर का व्यक्ति…..!
खुद कर रहा है “एन्टीसिपेट”….
कि भविष्य में….अवश्य ही….
वह घोषित होगा व्यक्ति “ग्रेट”….
इसी आस में सुरक्षित रखता है
होनी-अनहोनी सब घटनाओं की..
सिलसिलेवार तश्वीरें और “डेट”….
साथ ही….करता रहता है वह….
समय के साथ इनको “अपडेट”…
बस मौका मिलते ही….
इन्ही को कराता हुआ “कोरिलेट”
वह डेवलप कर लेता है….
खुद का आभासी संसार….
नैराश्य भाव और विषय पर…!
उसको कतई नहीं होता “फेट”….
दूसरों में भी होता है कुछ खास….
इस पर लगा लेता है वह “बेट”….
होती है उसकी बस एक ही आस
बढ़ता रहे उसका “डेवलपमेन्ट रेट”
नहीं चाहता वह कभी भी हो….
उसके सामाजिक जीवन में….
किसी टाइप का कोई “थ्रेट”…….
चाहता है वह….बस यही कि…
तुरुप का पत्ता….!
रहे हमेशा उनसे ही “सेट”…
हर कोई होकर हताश….
खटखटाता रहे उनका “गेट”…
और….समय-समय पर….
चढ़ाता रहे उस पर कुछ भेंट….
और सामने इनके बना रहे….
सदा ही दुम हिलाता “पेट”….
और ज्यादा क्या कहूँ….
मौका मिलते ही…..!
सब कुछ करते हुए “सेट-रिसेट”…
सोशल मीडिया पर….खुद को…
घोषित कर देते हैं “ग्रेट”….
मित्रों मान लीजिए इसको….!
मेरी तरफ से….इन पर….
किया गया थोड़ा सा “कमेंट”…
वैसे… आप सभी स्वतंत्र हैं….!
देने को अपना-अपना “जजमेंट”..

रचनाकार…..
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

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