लखनऊ: शहीद पथ ओमेक्स रेजीडेंसी में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 8 गिरफ्तार; कस्टमर सपोर्ट के नाम पर ठगी का था खेल

लखनऊ: लखनऊ पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। शहीद पथ स्थित ओमेक्स रेजीडेंसी में गुरुवार देर रात क्राइम ब्रांच और सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस की टीम ने छापेमारी की और फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस को मौके पर फर्जी कॉल सेंटर चलाते हुए 8 लोग मिले, जिन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। इन सभी से पूछताछ जारी है।पुलिस के मुताबिक, छापेमारी गुरुवार रात एक बजे शुरू हुई और शुक्रवार सुबह तक चली। इस दौरान कई घंटे तक जांच चलती रही। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध/साइबर अपराध) किरण यादव ने बताया कि पकड़े गए आठों लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। उनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया गया है। इनमें मौजूद डेटा की जांच की जा रही है।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये लोग कस्टमर सपोर्ट सर्विस के नाम पर लोगों को फोन करते थे। झांसे में फंसाकर उनके बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी और अन्य जरूरी डिटेल मांग लेते थे। इसके बाद खातों से पैसे उड़ा लिए जाते थे। पुलिस अब पूरे गिरोह की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और यह भी देख रही है कि यह गिरोह पहले पकड़े गए समिट बिल्डिंग वाले फर्जी कॉल सेंटर से जुड़ा है या नहीं।

ठगी का तरीका

जालसाजों ने ठगी का एक खास तरीका अपनाया था। वे खुद को कस्टमर सपोर्ट सर्विस का कर्मचारी बताते थे। लोगों से बात करके उनके मन में भरोसा जगाते और फिर धीरे-धीरे बैंक संबंधी जानकारी हासिल कर लेते थे। पुलिस को शक है कि इनके कई शिकार पूरे देश भर में हो सकते हैं।एडीसीपी किरण यादव ने बताया कि जालसाजों ने अपनी टीम को दो हिस्सों में बांटा हुआ था। हर टीम में दो लोग होते थे। एक को ओपनर कहा जाता था जो शुरुआती बात करता था और दूसरे को क्लोजर, जो आखिरी सौदा पक्का करता था। पुलिस इनकी भूमिकाओं की भी जांच कर रही है।

रात में क्यों की गई कार्रवाई?

पुलिस ने रात के समय छापेमारी इसलिए की क्योंकि विदेशों से इनके पास कॉल आती थी। सादे कपड़ों में सारी टीम मौके पर पहुंची ताकि जालसाजों को कोई भनक न लगे। इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच के अलावा सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस, एसओजी, साइबर थाना और साइबर सेल की टीम भी शामिल थी।पुलिस अब पकड़े गए आरोपियों के बैंक लेन-देन, उनके अन्य ठिकानों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। इस सफलता से साइबर ठगों पर नकेल कसने में पुलिस को मजबूत संकेत मिला है।
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