अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने का अनुभव अपने आप में बेहद खास है, लेकिन जब आसमान में सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण और अरोरा जैसी खगोलीय घटनाएं एक ही मिशन के दौरान देखने को मिलें तो यह अनुभव और भी यादगार हो जाता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद NASA के अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर और जैक हैथवे ने अंतरिक्ष से देखे गए ऐसे ही नजारों और अपने रोजमर्रा के अनुभवों के बारे में जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण देखना शानदार जरूर है, लेकिन अरोरा की चमकती और लहराती रोशनी का नजारा उससे भी ज्यादा प्रभावशाली है।
NASA के Crew-12 मिशन के तहत जेसिका मीर और जैक हैथवे फरवरी 2026 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे थे। दोनों लंबे अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा हैं। इस दौरान उन्हें पृथ्वी की कक्षा से कई दुर्लभ और खूबसूरत प्राकृतिक घटनाओं को देखने का मौका मिला। NASA के मुताबिक, Expedition 74 और उसके बाद Expedition 75 के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्री स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी गतिविधियों में भी लगातार शामिल रहे हैं।
अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण का अनुभव
12 अगस्त 2026 को साल का प्रमुख पूर्ण सूर्य ग्रहण हुआ। NASA के अनुसार यह पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से दिखाई दिया, जबकि उत्तरी गोलार्ध के कई इलाकों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा गया।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कक्षा और उस समय उसकी स्थिति के कारण जेसिका मीर और जैक हैथवे पूर्ण सूर्य ग्रहण के सबसे शानदार चरण को सीधे नहीं देख सके। हालांकि, उन्होंने आंशिक ग्रहण का अनुभव किया। अंतरिक्ष से किसी ग्रहण को देखना इसलिए भी खास होता है क्योंकि वहां से पृथ्वी की सतह, सूर्य की रोशनी और चंद्रमा की छाया का एक अलग ही दृश्य दिखाई देता है।
जैक हैथवे ने अंतरिक्ष से खगोलीय घटनाओं को देखने को लेकर उत्साह जाहिर किया है। वह आने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण को भी देखने की उम्मीद कर रहे हैं। NASA के खगोलीय कैलेंडर के अनुसार 27-28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण होने वाला है, जिसे दुनिया के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा।
अरोरा ने जीता अंतरिक्ष यात्रियों का दिल
अगर अंतरिक्ष से देखे गए किसी नजारे ने NASA के अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, तो वह अरोरा है। अरोरा को उत्तरी रोशनी यानी ऑरोरा बोरेलिस और दक्षिणी रोशनी यानी ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस के रूप में जाना जाता है।
जेसिका मीर के मुताबिक, सूर्य की मौजूदा सक्रियता के कारण अरोरा कई बार बेहद चमकदार और नाटकीय रूप में दिखाई देता है। अंतरिक्ष से देखने पर यह रोशनी पृथ्वी के वातावरण के ऊपर हरे, लाल और दूसरे रंगों की चमकती परतों की तरह नजर आती है।
एक खास घटना का जिक्र करते हुए मीर ने बताया कि सूर्य से निकली ऊर्जा के प्रभाव के बाद उन्होंने पृथ्वी के नीचे अरोरा की ऐसी लहरें देखीं, जो सांप की तरह मुड़ती और आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही थीं। अंतरिक्ष स्टेशन के बाहरी हिस्से पर भी इस हरी रोशनी की चमक दिखाई दे रही थी।
अंतरिक्ष से अरोरा देखने का अनुभव पृथ्वी से देखने की तुलना में बिल्कुल अलग होता है। जमीन से अरोरा आसमान में चमकती रोशनी के रूप में दिखाई देता है, जबकि ISS से अंतरिक्ष यात्री उसे पृथ्वी के घुमावदार किनारे के ऊपर फैली हुई विशाल रोशन पट्टी के रूप में देख सकते हैं।
सूर्य की सक्रियता से बढ़ रही अरोरा की चमक
अरोरा का संबंध सूर्य और पृथ्वी के बीच होने वाली अंतरिक्ष मौसम की गतिविधियों से है। सूर्य से निकलने वाले ऊर्जावान कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और ऊपरी वायुमंडल से संपर्क करते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान आकाश में अलग-अलग रंगों की चमक पैदा होती है।
2026 में सूर्य की गतिविधियां अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए खास रुचि का विषय बनी हुई हैं। ISS से ली गई तस्वीरों और वीडियो में भी कई बार पृथ्वी के ऊपर अरोरा की शानदार चमक रिकॉर्ड की गई है। जेसिका मीर ने अपने मिशन के दौरान पृथ्वी की तस्वीरें और अरोरा की तस्वीरें लेने में भी खास दिलचस्पी दिखाई है।
अंतरिक्ष में कुकिंग भी कर रहे एस्ट्रोनॉट्स
ISS पर अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी केवल वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रहती। लंबे मिशन के दौरान वे अपने शौक और मनोरंजन के लिए भी समय निकालते हैं। जेसिका मीर ने अंतरिक्ष स्टेशन पर खाना बनाने और वहां उगाई गई कुछ फसलों का स्वाद लेने में भी रुचि दिखाई है।
NASA की ओर से ISS पर अंतरिक्ष में उगाए गए पौधों और भोजन से जुड़े कई प्रयोग किए जाते हैं। ऐसे प्रयोग भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, खासकर जब इंसानों को चंद्रमा या मंगल जैसे दूर के मिशनों पर लंबे समय तक रहना होगा।
भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन भी जुलाई 2026 में ISS पहुंचे। NASA के अनुसार मेनन सोयुज MS-29 मिशन के जरिए अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे और वहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय क्रू में शामिल हुए। उनके साथ रूस के दो कॉस्मोनॉट भी स्टेशन पहुंचे थे।
संगीत और मनोरंजन से भी जुड़ा अंतरिक्ष जीवन
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स के लिए मानसिक स्वास्थ्य और मनोरंजन भी महत्वपूर्ण होता है। जेसिका मीर अपने साथ पिकोलो जैसा संगीत वाद्ययंत्र भी लेकर गई हैं। उन्होंने अंतरिक्ष मिशन के दौरान संगीत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।
वहीं जैक हैथवे ने बताया है कि अंतरिक्ष स्टेशन पर मनोरंजन के लिए संगीत और कराओके जैसी गतिविधियां भी होती हैं। लंबे मिशन के दौरान ऐसी गतिविधियां अंतरिक्ष यात्रियों को तनाव कम करने और टीम के साथ बेहतर समय बिताने में मदद करती हैं।
ISS में पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर रहकर अंतरिक्ष यात्री जिस तरह वैज्ञानिक काम, व्यायाम, खाना, संगीत और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाते हैं, वह अंतरिक्ष जीवन की एक अलग तस्वीर सामने लाता है।
अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने का अनुभव सबसे अलग
NASA के अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक खोज का क्षेत्र नहीं है। वहां से पृथ्वी को देखने पर इंसान को अपने ग्रह की विशालता और खूबसूरती का अलग एहसास होता है। अरोरा, ग्रहण, तारों की रोशनी और पृथ्वी के ऊपर दिखाई देने वाला वातावरण अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है, लेकिन हर घटना अपने आप में खास होती है।
जेसिका मीर और जैक हैथवे का अनुभव यह भी दिखाता है कि अंतरिक्ष मिशन में विज्ञान के साथ-साथ मानवीय अनुभवों की भी अहम भूमिका है। एक तरफ वे माइक्रोग्रैविटी, मानव शरीर और तकनीक से जुड़े प्रयोग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच होने वाली प्राकृतिक घटनाओं को अपनी आंखों से देख रहे हैं।
आने वाले दिनों में चंद्र ग्रहण और अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी के नए दृश्यों के कारण अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों पर लोगों की नजर बनी रहेगी। NASA के लिए भी ISS वैज्ञानिक अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
