नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल बाढ़ में अब तक 579 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1,924 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच भारत ने राहत और बचाव अभियान में हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के गोंडा में कहा कि भारत सरकार नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी मदद भेजी जा रही है।
कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि नेपाल में आपदा की जानकारी मिलते ही वहां मौजूद भारतीय मिशन ने 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू कर दी थी। इसका उद्देश्य नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि भारतीय मिशन लगातार हालात पर नजर रख रहा है और नेपाल सरकार के साथ समन्वय किया जा रहा है।
भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने का सिलसिला जारी है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, 10 टन मानवीय सहायता की तीसरी खेप भी नेपाल भेजी गई है। इसमें जरूरत की सामग्री और चिकित्सा सहायता शामिल है। भारत पहले भी विशेष विमानों के जरिए राहत सामग्री और मेडिकल सहायता नेपाल भेज चुका है।
579 लोगों की मौत, 1,924 अब भी लापता
नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या 579 तक पहुंच गई है। नेपाल की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 579 शव बरामद किए जा चुके हैं और 101 घायल लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। लापता लोगों में आम नागरिकों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी, विदेशी नागरिक और सुरक्षा तथा सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक केवल नेपाल में 1,924 लोग लापता हैं। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े 933 लोग और 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है। भारत सरकार इस वजह से अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
विशेष विमान से भेजी जा रही राहत सामग्री
विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि भारत ने नेपाल को मेडिकल सहायता और जरूरी सामान भेजना शुरू कर दिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई थी और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता देने की पेशकश की थी।
इसके बाद भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए राहत सामग्री नेपाल भेजी गई। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाइयां जैसी जरूरी सामग्री शामिल थी।
भारत की ओर से राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप भी भेजी जा रही है। भारत ने नेपाल के साथ राहत और बचाव अभियान में समन्वय बढ़ाया है। विदेश राज्य मंत्री के मुताबिक नेपाल सरकार जैसे-जैसे जरूरत बताएगी, भारत उसी के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश करेगा।
सीमा पर भी भारत की नजर
गोंडा में कीर्तिवर्धन सिंह ने नेपाल में बाढ़ के अलावा सीमा से जुड़े संभावित खतरों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बल सीमा क्षेत्र में तैनात हैं और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि भारत नेपाल में स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अगर प्रभावित गांवों से लोगों को निकालने या किसी अन्य तरह की सहायता की जरूरत पड़ती है तो भारत आवश्यक कदम उठाएगा।
नेपाल में बाढ़ के बाद पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में राहत अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कई स्थानों पर सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय नागरिकों की तलाश पर भी फोकस
नेपाल बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। आकाशवाणी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने 320 भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने या लापता होने की जानकारी दी है। भारत सरकार और भारतीय मिशन इन लोगों की जानकारी जुटाने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें निकालने के प्रयास में लगे हैं।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि हेल्पलाइन के जरिए लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल रही है कि कौन लोग कहां फंसे हैं और किस स्थान पर तत्काल सहायता की जरूरत है।
नेपाल सरकार से समन्वय कर रहा भारत
कीर्तिवर्धन सिंह ने साफ किया कि नेपाल सरकार की जरूरत के मुताबिक भारत अपनी सहायता बढ़ाएगा। उनका कहना है कि राहत और बचाव अभियान में दोनों देशों के बीच जरूरी समन्वय किया जा रहा है।
इस बीच नेपाल सरकार ने भारत और चीन समेत विदेशी विशेषज्ञों की सहायता स्वीकार करने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआती दौर में नेपाल ने विदेशी बचाव दलों को लेकर सीमित रुख अपनाया था, लेकिन आपदा की गंभीरता बढ़ने के बाद भारत और चीन के विशेषज्ञों को सहायता के लिए मंजूरी दी गई।
नेपाल में आई यह आपदा अब क्षेत्रीय स्तर पर बड़ी मानवीय चुनौती बन चुकी है। भारत सहित कई देशों ने राहत सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना है।
नेपाल में नेपाल बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े भी बदल सकते हैं। भारत सरकार ने संकेत दिया है कि नेपाल की जरूरत के अनुसार आने वाले दिनों में भी सहायता जारी रखी जाएगी।
