जंतर-मंतर प्रदर्शन: सोशल मीडिया ग्रुपों से भीड़ जुटाने के दावे, डिजिटल नेटवर्क पर उठे सवाल

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच अब भीड़ जुटाने के तरीके को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के पीछे एक संगठित डिजिटल नेटवर्क सक्रिय है, जो सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों तक लगातार संदेश पहुंचा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

टेलीग्राम और मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल का दावा

रिपोर्टों के मुताबिक, टेलीग्राम, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, सिग्नल और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े ग्रुप बनाए गए हैं। दावा है कि इन ग्रुपों के जरिए प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को समय, स्थान और आने-जाने से जुड़ी जानकारी दी जाती है।

बताया जा रहा है कि कुछ टेलीग्राम ग्रुपों में हजारों सदस्य जुड़े हुए हैं और संदेश मिलते ही अलग-अलग इलाकों से लोग प्रदर्शन स्थल की ओर रवाना हो जाते हैं।

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रोटेशन सिस्टम से भीड़ बनाए रखने का दावा

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि प्रदर्शन स्थल पर भीड़ बनाए रखने के लिए रोटेशन सिस्टम अपनाया जा रहा है। इसके तहत एक समूह के लौटने के बाद दूसरा समूह पहुंचता है। इससे पूरे दिन अलग-अलग समय पर प्रदर्शन स्थल पर लोगों की मौजूदगी बनी रहती है।

हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर किसी सरकारी एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

डिजिटल टीम के सक्रिय होने की चर्चा

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि इस पूरे अभियान के संचालन में तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े लोग ऑनलाइन समन्वय कर रहे हैं। साथ ही कुछ संस्थाओं और एनजीओ के जुड़े होने के भी दावे किए जा रहे हैं।

फिलहाल इन दावों से जुड़े किसी संगठन या व्यक्ति की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही संबंधित एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की है।

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पुलिस ने की थी भीड़ नियंत्रित करने की कोशिश

सोमवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाकर भीड़ नियंत्रित करने का प्रयास किया था। इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल पर लोगों की आवाजाही जारी रहने की बात सामने आई।

जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

डिजिटल नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन के संचालन से जुड़े दावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में इन दावों की सच्चाई संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय नोट: इस खबर में डिजिटल नेटवर्क, एनजीओ और भीड़ प्रबंधन से जुड़े बिंदु विभिन्न दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।

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