लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिना पंजीकरण के मनमाने तरीके से लोन देने, भारी ब्याज वसूलने और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोगों का आर्थिक शोषण करने वाले संस्थानों पर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने ऐसे गैर-पंजीकृत वित्तीय संस्थानों और अवैध ऋणदाताओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाया जा सके।
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना वैध अनुमति के लोन का कारोबार करने वाले व्यक्तियों, कंपनियों और संस्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही आम जनता को भी जागरूक करने पर जोर दिया गया, ताकि वे किसी भी संस्था से लोन लेने या निवेश करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें।
सरकार का मानना है कि कई गैर-पंजीकृत संस्थाएं जरूरतमंद लोगों को आसान लोन का लालच देकर पहले भारी प्रोसेसिंग फीस वसूलती हैं और बाद में अत्यधिक ब्याज तथा अनैतिक वसूली के जरिए उनका आर्थिक शोषण करती हैं। कई मामलों में उपभोक्ताओं को धमकाने और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों पर अब सख्ती से रोक लगाने की तैयारी की गई है।
बैठक में संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार चाहती है कि लोगों का भरोसा अधिकृत और वैध वित्तीय संस्थानों पर बना रहे तथा अवैध लोन कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
सरकार की इस पहल से प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर वे लोग, जो तत्काल पैसों की जरूरत के कारण गैर-पंजीकृत संस्थाओं के जाल में फंस जाते हैं, अब उन्हें बेहतर सुरक्षा और कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।
