AI Jobs Update: AI नौकरियां छीन रहा है तो क्यूँ है फ्रेशर्स परेशान, एक रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Nomura report AI jobs India

एशिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरियों के हालात तेजी से बदल रहे हैं। नोमुरा की एक नई रिपोर्ट, जिसका नाम “Beyond the Headlines: AI Has Added Jobs in Asia—So Far” है, बताती है कि 2022 से अगस्त 2026 तक AI ने जितनी नौकरियां खत्म कीं, उससे कहीं ज्यादा नई नौकरियां पैदा कीं। पूरे एशिया में करीब 1.31 लाख AI से जुड़ी नई नौकरियां सामने आईं, जबकि सिर्फ 61 हजार नौकरियां कम हुईं। भारत इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 83,100 नई नौकरियां मिलीं और 31,921 नौकरियां या तो खत्म हुईं या लोगों ने छोड़ दीं। भारत, चीन और फिलीपींस जैसे देशों में नौकरियों की कुल संख्या बढ़ी है।

हालांकि, इस अच्छी खबर के पीछे एक चिंताजनक बात भी है। समस्या कुल नौकरियों की कमी नहीं है, बल्कि कॉलेज से निकलने वाले नए छात्रों के लिए अवसर कम होने की है। कंपनियां बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने की बजाय “साइलेंट फायरिंग” का तरीका अपना रही हैं। इसका मतलब है कि वे मौजूदा कर्मचारियों को नहीं निकाल रही हैं, बल्कि नई भर्तियां और कैंपस से प्लेसमेंट कम कर रही हैं। इस वजह से युवाओं के लिए अपना करियर शुरू करना बहुत मुश्किल हो गया है।

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रिपोर्ट्स बताती हैं कि बाजार में एक खास K-आकार का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कंपनियों को अनुभवी प्रोफेशनल्स की बहुत ज़रूरत है, लेकिन नए ग्रेजुएट्स या फ्रेशर्स की मांग में भारी कमी आई है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) के एक सर्वे के मुताबिक, भारत की 55% आईटी कंपनियों ने एंट्री-लेवल पर हायरिंग कम कर दी है, जबकि सीनियर पदों के लिए यह कमी सिर्फ 14% है। AI अभी आसान और रोज़मर्रा के कामों को ऑटोमेट कर पा रहा है, लेकिन बिज़नेस की समझ, मैनेजमेंट और लोगों के साथ काम करने जैसे कामों में अनुभवी लोगों की जगह अभी नहीं ले पाया है।

कंपनियां लोगों को नौकरी से निकालने के बजाय नई भर्तियां कम कर रही हैं। नोमुरा ने इसे ‘साइलेंट फायरिंग’ कहा है। स्टाफिंग फर्म Xpheno के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय आईटी सेक्टर में नेट हायरिंग वित्त वर्ष 2022 में करीब 6 लाख से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 1.4 लाख रह गई है। कैंपस प्लेसमेंट में आई यह सुस्ती युवाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

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AI की वजह से नौकरियों में सबसे ज़्यादा असर फाइनेंशियल सर्विसेज (लगभग 58%) और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर पड़ा है। जिन कामों पर सबसे ज़्यादा असर हुआ है उनमें शामिल हैं: बैंकिंग के बैक-ऑफिस काम जैसे कि रिकॉन्सिलिएशन, डेटा एंट्री और कंप्लायंस, कस्टमर सपोर्ट (जहां चैटबॉट्स इंसानों की जगह ले रहे हैं), और जूनियर टेक रोल्स जैसे बेसिक कोडिंग और क्वालिटी एश्योरेंस (QA) टेस्टिंग। दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे सेक्टर्स ज़्यादा सुरक्षित हैं, क्योंकि इनमें लोगों का वहां मौजूद होना और फिजिकल काम की ज़रूरत होती है।

नई AI नौकरियों में से 90% से ज़्यादा टेक सेक्टर में ही बन रही हैं। भारत में मुख्य रूप से डेटा एनोटेशन, लिंग्विस्टिक्स और AI-आधारित आईटी सर्विसेज में भर्तियां हो रही हैं। इसके अलावा, बैंकों में AI रिस्क एनालिस्ट और ऑटोनॉमस व्हीकल से जुड़े स्पेशलिस्ट्स की मांग भी बढ़ी है। भारत के पास बड़ी संख्या में आईटी टैलेंट है, इसलिए अवसर बहुत हैं, लेकिन बेसिक कोडिंग और रोज़मर्रा के बैक-ऑफिस कामों पर ऑटोमेशन का खतरा बना हुआ है। असली सवाल यह है कि जब एंट्री-लेवल के पद ही खत्म हो जाएंगे, तो

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